आज के समय में जिस भी किसी व्यक्ति से बात करो, तो उन्हें कोई ना कोई शारीरिक समस्या जरूर होती है, इसका कारण खराब लाइफस्टाइल है। इन समस्याओं में शरीर में खून की कमी होना भी शामिल है। शरीर में खून यानि आयरन की कमी होने पर कुछ सामान्य लक्षण दिखते हैं, जिसमें हर समय थकान महसूस होना, चक्कर आना, सांस फूलना जैसे लक्षण हैं। लेकिन ध्यान रखें कि हर बार इस तरह के लक्षण आयरन की कमी के हों, ये जरूरी नहीं होते हैं। कई मामलों में यही संकेत ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की ओर भी इशारा कर सकते हैं। यही वजह है कि दोनों स्थितियों के बीच मरीजों का कन्फ्यूजन होना काफी आम बात है।
नारायणा हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रीति अग्रवाल का कहना है कि आयरन डेफिशिएंसी और ब्लड कैंसर दोनों में शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने वाली रेड ब्लड सेल्स प्रभावित हो सकती हैं। इससे शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती और व्यक्ति लगातार थका हुआ महसूस करता है। आइए इस विषय को वीडियो के जरिेए विस्तार से समझते हैं-
ब्लड कैंसर और आयरन की कमी में कुछ लक्षण काफी मिलते-जुलते हो सकते हैं, जो निम्न हैं-
शरीर में लगातार थकान और कमजोरी होना।
चक्कर आना
सांस फूलना
स्किन का पीला पड़ना
बार-बार कमजोरी महसूस होना
ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, इत्यादि।
दोनों के कुछ लक्षण समान होने की वजह से कई लोग लंबे समय तक इसे सिर्फ कमजोरी या पोषण की कमी समझते रहते हैं।
हालांकि, कुछ ऐसे लक्षण भी हैं, जो ब्लड कैंसर की ओर ज्यादा संकेत करते हैं। जैसे-
बार-बार बुखार आना
बिना वजह वजन कम होना
रात में ज्यादा पसीना आना
शरीर पर आसानी से नीले निशान पड़ना
बार-बार इन्फेक्शन होना
हड्डियों या जोड़ों में दर्द
लिम्फ नोड्स में सूजन, इत्यादि।
अगर थकान के साथ ये लक्षण भी दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
डॉक्टर कहती हैं कि आयरन डेफिशिएंसी होने का कारण खराब खानपान, शरीर में खून की कमी, महिलाओं में ज्यादा ब्लीडिंग, प्रेग्नेंसी या पोषक तत्वों की कमी के कारण होती है। इस स्थिति को सही डाइट और सप्लीमेंट्स की मदद से काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।
वहीं, ब्लड कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसमें बोन मैरो और ब्लड सेल्स प्रभावित होने लगते हैं। इसका इलाज पूरी तरह डॉक्टर की निगरानी में होता है।
अगर मरीज को कमजोरी और थकान लंबे समय तक बनी रहे या आयरन की दवा लेने के बाद भी आराम न मिले, तो सिर्फ सेल्फ डायग्नोसिस पर भरोसा करना सही नहीं होता है। ऐसी स्थिति में मरीजों को फौरन डॉक्टर से सलाह की जरूरत होती है।
कभी ऐसा हुआ है कि एग्जाम के ठीक पहले या किसी इंटरव्यू में अपनी बारी का इंतजार करते समय अचानक पेट में अजीब सी “तितली उड़ने” जैसी फीलिंग होने लगे? दिल की धड़कन तेज हो जाए, हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगें और दिमाग में घबराहट बढ़ने लगे। यह कोई अजीब या डरावनी बात नहीं है, बल्कि शरीर की एक नेचुरल साइकोलॉजिकल और बायोलॉजिकल प्रक्रिया है। जब हम किसी टेंशन या परफॉर्मेंस वाली स्थिति में होते हैं, तो हमारा दिमाग उसे एक चुनौती की तरह लेता है और शरीर तुरंत रिएक्ट करता है।
इसी वजह से यह फीलिंग पैदा होती है, जिसे हर उम्र के लोग कभी न कभी महसूस करते हैं। खास बात यह है कि यह स्थिति बताती है कि आपका शरीर एक्टिव होकर आपको बेहतर परफॉर्म करने के लिए तैयार कर रहा है, न कि आपको कमजोर बना रहा है।
पेट और दिमाग का सीधा कनेक्शन
हमारे शरीर में पेट और दिमाग एक-दूसरे से सीधे जुड़े होते हैं। पेट में मौजूद नसों का एक बड़ा नेटवर्क होता है, जिसे “सेकेंड ब्रेन” भी कहा जाता है। यह दिमाग से वेगस नर्व के जरिए जुड़ा रहता है। इसलिए जब दिमाग तनाव में आता है, तो उसका असर सीधे पेट तक पहुंचता है और हमें घबराहट या मरोड़ जैसा महसूस होने लगता है।
‘फाइट या फ्लाइट’ मोड कैसे काम करता है?
जब हम किसी परीक्षा या इंटरव्यू जैसी स्थिति में जाते हैं, तो दिमाग इसे एक चुनौती की तरह समझता है। ऐसे में शरीर खुद को बचाने के लिए “फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स” एक्टिव कर देता है। इस दौरान एड्रेनालिन और कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन तेजी से रिलीज होते हैं, जो शरीर को तुरंत एक्शन के लिए तैयार करते हैं।
शरीर में क्या बदलाव होते हैं?
इन हार्मोन्स की वजह से दिल की धड़कन तेज हो जाती है, सांसें जल्दी चलने लगती हैं और शरीर की एनर्जी मांसपेशियों की तरफ शिफ्ट हो जाती है। इसी वजह से पेट में हलचल, घबराहट और बेचैनी महसूस होती है।
इस घबराहट को कैसे करें कंट्रोल?
गहरी सांस लेना
धीरे-धीरे गहरी सांस लें और छोड़ें। इससे दिमाग को सिग्नल मिलता है कि सब कुछ ठीक है और तनाव कम होने लगता है।
पॉजिटिव सोच रखें
इस घबराहट को डर नहीं, बल्कि तैयारी का हिस्सा समझें। यह शरीर का नेचुरल रिएक्शन है जो आपको बेहतर परफॉर्म करने के लिए तैयार कर रहा है।
हल्का खाना खाएं
एग्जाम या इंटरव्यू से पहले भारी और तला-भुना खाना न खाएं, ताकि पेट पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और शरीर हल्का महसूस करे